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जन्माष्टमी 2019 : कब है जन्माष्टमी, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि :Janmashtami 2019 : Date and Shubh Muhurt In India


जन्माष्टमी 2019 : कब है जन्माष्टमी, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि :

खास बातें :

1) श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना गया है।

2) हिंदू पंचांग के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि अर्थात आठवें दिन मनाई जाती है।

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3) श्री कृष्ण का जन्म भादो माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था।

4) श्री कृष्ण के जन्मदिन को श्रीकृष्ण जयंती या जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।

5) देश भर में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी :

यह त्यौहार हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था।

जन्माष्टमी 2019 कब है?

इस बार कृष्ण जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोग काफी असमंजस में हैं। ज्यादातर लोग इस उलझन में है कि जन्माष्टमी 23 अगस्त या फिर 24 अगस्त को मनाई जाए। कुछ लोग जन्माष्टमी अष्टमी तिथि को मनाते हैं तो कुछ लोग रोहिणी नक्षत्र होने पर ही जन्माष्टमी पर्व मनाते हैं। अगर अष्टमी तिथि के हिसाब से देखें तो 23 अगस्त को जन्माष्टमी होनी चाहिए लेकिन अगर रोहिणी नक्षत्र के हिसाब से देखें तो  24 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी होनी चाहिए। इसलिए तिथि के हिसाब से जन्माष्टमी 23 अगस्त को मनाई जाएगी वहीं नक्षत्र को प्रधानता देने वाले लोग 24 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व मना सकते हैं।


जन्माष्टमी 2019 की तिथि और शुभ मुहूर्त :

जन्माष्टमी की तिथि : 23 अगस्त और 24 अगस्त 


अष्टमी तिथि प्रारंभ : 23 अगस्त को सुबह 08 बजकर 09 मिनट से

अष्टमी तिथि समाप्त : 24 अगस्त को सुबह 08 बजकर 32 मिनट तक

रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ : 24 अगस्त की सुबह 3 बजकर 48 मिनट से 

रोहिणी नक्षत्र समाप्त : 25 अगस्त सुबह 4 बजकर 17 तक


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जन्माष्टमी व्रत :

भगवान श्री कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भक्तगण पूरे दिन जन्माष्टमी का व्रत रखते हैं और प्रभु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन क्या बच्चे, क्या बूढ़े सभी अपने आराध्य के जन्म की खुशी में दिनभर व्रत रखते हैं और कृष्ण की महिमा का गुणगान करते हैं।

व्रत का पारण :

जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने वाले भक्तों को अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के खत्म होने के बाद व्रत का पारण करना चाहिए ।अगर दोनों का संयोग नहीं हो पा रहा है तो अष्टमी या रोहिणी नक्षत्र उतरने के बाद व्रत का पारण किया जाना चाहिए।


जन्माष्टमी की पूजा विधि :

अगर आप भी अपने घर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मना रहे हैं इस तरह भगवान की पूजा कर उन्हें प्रसन्न करें:

  • जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर में लड्डू गोपाल बाल गोपाल की मूर्ति को पहले गंगाजल से स्नान कराएं ।
  • इसके बाद मूर्ति को दूध, दही ,घी ,शक्कर, शहद और केसर के घोल से स्नान कराएं।
  • अब शुद्ध जल से स्नान कराएं।
  • इसके बाद लड्डू गोपाल को सुंदर वस्त्र पहनाए और उनका श्रृंगार करें।
  • रात 12:00 बजे भोग लगाकर लड्डू गोपाल की पूजन और आरती करें।
  • घर के सभी सदस्य में प्रसाद का वितरण करें ।
  • अगर आप व्रत कर रहे हैं तो दूसरे दिन नवमी को व्रत का पारण करें।


श्री कृष्ण के जन्म की कथा :

द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करते थे।उनका बेटा कंस बहुत ही पापी और अत्याचारी था। उसने अपने पिता को गद्दी से उतार दिया और खुद मथुरा का राजा बन बैठा।कंस की बहन देवकी का विवाह वसुदेव नाम के यदुवंशी सरदार से हुआ था। कंस  विवाह के बाद देवकी को उसके ससुराल पहुंचाने जा रहा था तभी रास्ते में अचानक आकाशवाणी हुई- "हे कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है उसी  का आठवां संतान तेरा वध करेगा "। आकाशवाणी सुनने के बाद कंस देवकी और वासुदेव को कारागृह में डाल देता है और उनके 7 संतानों को पैदा होते ही मार डालता है।


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जब देवकी ने श्री कृष्ण को अपने आठवें पुत्र के रूप में जन्म दिया तब भगवान विष्णु ने वासुदेव को आदेश दिया कि वे श्री कृष्ण को गोकुल में यशोदा माता और नंद बाबा के पास पहुंचा आए जहां वह अपने मामा कंस सुरक्षित रह सकेंगे। श्री कृष्ण का पालन-पोषण यशोदा माता और नंद बाबा के देखरेख में हुआ। बस उनके जन्म के खुशी में तभी से प्रतिवर्ष जन्माष्टमी का त्योहार पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

तैयारियां :

जन्माष्टमी के दिन मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है। मंदिरों में झांकियां लगाई जाती है और भगवान श्री कृष्ण के बाल गोपाल रूप को झूला झुलाया जाता है।मंदिरों में पूरे दिन रासलीला और भजन कीर्तन का आयोजन किया जाता है और महाप्रसाद का वितरण किया जाता है।

दही- हांडी / मटकी फोड़ प्रतियोगिता :


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जन्माष्टमी के दिन देश में अनेक जगह पर दही हांडी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। छाछ दही से भरी हुई मटकी को एक रस्सी की सहायता ऊंचाई पर लटका दिया जाता है और बाल गोविंदा द्वारा मटकी फोड़ने का प्रयास किया जाता है । दही हंडी प्रतियोगिता में मटकी फोड़ने वाले विजेता टीम को उचित इनाम देकर प्रोत्साहित किया जाता है

जन्माष्टमी के दिन अगर भगवान श्री कृष्ण कि सच्चे मन से आराधना की जाती है तो वह अपने भक्तों पर अत्यंत प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों को मनवांछित फल प्रदान करते हैं, इसीलिए प्रेम से बोलिए -

 " जय श्री कृष्णा  "                                                                             





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