Header Ads

माँ मुंडेश्वरी धाम : अद्भुत और अनोखा । Mundeshwari Devi Temple : Miracle Temple Of Bihar

बिहार राज्य के कैमूर जिले में एक अनोखा और प्राचीन मंदिर स्थित है जिसे हम 'मां मुंडेश्वरी' धाम के नाम से जानते है। मां मुंडेश्वरी धाम वस्तुतः ऐतिहासिक, सामाजिक, धार्मिक और पुरातात्विक पक्षों का दुर्लभ संगम है। मुंडेश्वरी धाम एक शक्तिपीठ भी है।

       माकोटास्ये  महाकोट: शिवा च मुंडकेश्वरी ।
       मंडलेश्वर  पीठे  च  शंकर:  खांडवी  शिवा ।।

अर्थात मां शक्ति और मुंडकेश्वर महादेव मंडलेश्वर पीठ में एक ही स्थान पर है, इसीलिए यह एक शक्तिपीठ है।


 कैमूर ( भभुआ ),माँ मुंडेश्वरी ,मामुण्डेश्वरी देवी टेम्पल,Maa Mundeshwari Devi Temple


यह मंदिर कहां स्थित है?

बिहार की राजधानी पटना से 200 किलोमीटर और विश्व विख्यात धार्मिक नगरी काशी से 80 किलोमीटर पूर्व  बिहार के भभुआ जिले में स्थित यह  मंदिर अपारशक्ति का उद्गम स्थल है जिसे भारतवर्ष का प्राचीनतम मंदिर होने का गौरव प्राप्त है। भभुआ से 15 किलोमीटर की दूरी पर पौरा गांव में धरातल से करीब 600 फीट ऊंचे पर्वत शिखर यह मंदिर स्थित है। प्राचीनतम मंदिर में से एक यह मुंडेश्वर मंदिर जिस पर्वत पर स्थित है वह कभी महर्षि अत्रि का तपस्या क्षेत्र हुआ करता था। रामायण में इसी प्रदेश को 'करूष' नाम से भी संबोधित किया गया है। यह पवित्र धाम भारतवर्ष के ऐतिहासिक ,पौराणिक और सांस्कृतिक विरासत से संबंधित विभिन्न पहलुओं को स्थापित भी करता है।


मुंडेश्वरी मंदिर कैसे पहुंचे ?

मुंडेश्वरी मंदिर पहुंचने के लिए भभुआ रोड, मंदिर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। यह मुगलसराय - गया रेलखंड लाइन पर है। स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब 25 किलोमीटर है। मोहनिया से सड़क मार्ग से मुंडेश्वरी धाम बड़ी आसानी से पहुंचा जा सकता है। पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ को काटकर सीढ़ियां और सड़क बनाई गई है। इन सड़कों से होते हुए कार, जीप व बाइक से भी ऊपर मंदिर तक पहुंचना आसान हो गया है।

यह भी पढ़े : कामाख्या देवी मंदिर : अद्भुत और रहस्यमयी


मंदिर का नाम मुंडेश्वरी धाम कैसे पड़ा ?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चंड - मुंड नाम के असुरों का वध करने के लिए माता यहां आई थी। चंड का वध करने के बाद जब माता मुंड का वध करने आई तो वो यहां इसी पहाड़ी में छिप गया था। यही पर  आदिशक्ति माता अंबिका ने मुंड असुर का वध किया और माता मुंडेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध हो गई।


 कैमूर ( भभुआ ),माँ मुंडेश्वरी ,मामुण्डेश्वरी देवी टेम्पल,Maa Mundeshwari Devi Temple

मां मुंडेश्वरी की महिमा:

मां मुंडेश्वरी की महिमा अपरंपार है। यहां पर माता के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सच्चे मन से मांगी हुई मनोकामना को माता अवश्य ही पूरा करती है। इस मंदिर में माता के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है फिर वह वक्त चाहे हिंदू हो या अन्य धर्म के लोग। रामनवमी और शिवरात्रि के मौके पर हर साल भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ इस मंदिर में माता के दर्शन करने के लिए पहुंचती है। नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाला वार्षिक मिला इस मंदिर का विशेष आकर्षण है जिसे देखने के लिए हर साल हजारों लाखों लोग पहुंचते हैं।


माता के मंदिर में होता है अद्भुत चमत्कार:

मां मुंडेश्वरी के मंदिर में होने वाले चमत्कारों को देखकर भक्तजनों को अपनी आंखों पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है।आइए जानते है उन चमत्कारों के बारे में:


1) बलि देने के बाद भी नहीं जाती है बकरे की जान:

नकरात्र के दौरान मां मुंडेश्वरी धाम में बलि चढ़ाने की परंपरा है। देवी मां से मांगी हुई मन्नत पूरी होने के बाद भक्तगण माता को बलि के रुप में बकरा चढ़ाते हैं। बकरे की बलि तो बहुत से मंदिर में दी जाती है लेकिन इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है पशु बलि की सात्विक परंपरा। यहां पर बकरे की बलि के दौरान कुछ ऐसा घटित होता है जिसे देखकर सभी हैरान हो जाते हैं।

 कैमूर ( भभुआ ),माँ मुंडेश्वरी ,मामुण्डेश्वरी देवी टेम्पल,Maa Mundeshwari Devi Temple


दरअसल यहां पर बलि में बकरा चढ़ाया जाता है ,लेकिन उसका जीवन नहीं लिया जाता है। बलि देने वाले बकरे को मंदिर में लाकर देवी मां की मूर्ति के सामने खड़ा कर दिया जाता है। शुरू- शुरू में बकरा इधर-उधर भागने की कोशिश करता है लेकिन जैसे ही मंदिर का पुजारी माता की मूर्ति को स्पर्श कराकर चावल बकरे पर फेंकता है बकरा उसी क्षण अचेत, मूर्छित और मृतप्राय सा हो जाता है।थोड़ी देर बाद पुजारी दोबारा अक्षत माता को छुआ कर अचेत बकरे पर फेंकता है तो बकरा उसी क्षण तुरंत उठ कर खड़ा हो जाता है और इसके बाद ही उसे मुक्त कर दिया जाता है।

यह भी पढ़े : अमरनाथ गुफ़ा : अदभुत और रहस्यमयी


2) यहां शिवलिंग का रंग बदलता रहता है:

देवी के इस मंदिर के गर्भगृह के अंदर एक प्राचीन पंचमुखी शिवलिंग है। मान्यता है कि इस शिवलिंग का रंग सुबह, दोपहर और शाम को अलग अलग होता है। शिवलिंग का रंग कब अपने आप बदल जाता है,पता भी नहीं चलता है। यहां भगवान भोलेनाथ के पंचमुखी  शिवलिंग का सुबह श्रृंगार करके रुद्राभिषेक किया जाता है। प्रत्येक सोमवार यहां भक्तों की भारी भीड़ शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए इकट्ठा होती है।



मां मुंडेश्वरी धाम की कुछ अन्य विशेषताएं :

1) मां मुंडेश्वरी का मंदिर भारत  का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। यहां पर पूजा की परंपरा 1900 सालों से लगातार चली आ रही है। यह मंदिर आज भी पूरी तरह से जीवंत हैं।

2) यहां से प्राप्त शिलालेखों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण उदय सिंह के शासनकाल में हुआ था ।'पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग' के अनुसार मंदिर का शिल्प व प्रतिमाएं  उत्तर गुप्तकालीन समय की है।

3) मां मुंडेश्वरी के रूप में या दुर्गा का वैष्णवी रूप प्रतिस्थापित है। मुंडेश्वरी की प्रतिमा वाराही देवी की प्रतिमा है, क्योंकि इनका वाहन महिष है।

4) मुंडेश्वरी मंदिर अष्टकोणीय है और इसका मुख्य द्वार दक्षिण की ओर है। इसका अष्टाकार गर्भगृह इसके निर्माण से लेकर अब तक कायम है।


5) जानकारों के हिसाब से उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और नेपाल के कपिलवस्तु का मार्ग मुंडेश्वरी मंदिर से जुड़ा हुआ था।

6) यह मंदिर 'प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम' 1958 के अधीन, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा राष्ट्रीय महत्व का घोषित है।

7) मुंडेश्वरी मंदिर का संरक्षक एक मुस्लिम परिवार है जो वर्षों से इस मंदिर के संरक्षण का कार्य करता आ रहा है।

मां मुंडेश्वरी का धाम हर धर्म के लोगों के लिए खुला है। यहां पर आने वाले सभी भक्तगणों की मनोकामना माता अवश्य ही पूरा करती है। सचमुच में यह धाम अद्भुत और अनोखा है।


1 comment: