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महा कुंभ मेला 2019 शाही स्नान की तारीख । Maha Kumbh mela 2019 dates in hindi

कुंभ मेला :

सनातन धर्म के अनुसार कुंभ मेला भारत में मनाए जाने वाला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है।। कुंभ पर्व हिंदू धर्म के लोगों का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। आस्था का इस  महान पर्व में देश भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी हजारों -लाखों श्रद्धालु कुंभ पर्व स्थल पर एकत्रित होते हैं।


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महाकुंभ मेला 


कुंभ पर्व कहां मनाया जाता है :

चार कुंभ पर्व स्थल हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक है। इनमें से प्रत्येक स्थान पर प्रति बारहवें वर्ष और प्रयागराज में दो कुंभ पर्वों के बीच छः वर्ष के अंतराल पर अर्ध कुंभ का आयोजन होता है।

कुंभ पर्व कब मनाया जाता है :

कुंभ का मेला मकर सक्रांति के दिन प्रारंभ होता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा, वृश्चिक राशि में और बृहस्पति मेष राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन जो योग बनता है उसे कुंभ स्नान योग कहते हैं। इस दिन को विशेष मांगलिक माना जाता है और इस दिन कुंभ मेले में पवित्र नदी में स्नान करने और तीन डुबकी लगाने से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते हैं और आत्मा को उच्च लोंक की प्राप्ति सहजता से हो जाती है।

अर्धकुंभ :

'अर्ध' शब्द  का अर्थ होता है आधा । पूर्ण कुंभ पर्व बारह वर्ष के अंतराल पर आता है लेकिन अर्धकुंभ , पूर्ण कुंभ के 12 वर्ष के अंतराल के बीच में अर्थात छः वर्ष बाद आयोजित होता है । 2013 का कुंभ प्रयागराज में हुआ था इसलिए 2019 में प्रयागराज में अर्धकुंभ मेले का आयोजन होने जा रहा है।

कुंभ पर्व का महत्व :

कुंभ का अनुभव अपने आप में ही आध्यात्मिक है। कुंभ पर्व हिंदू धर्म के लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है । कुंभ पर्व तथा अर्ध कुंभ के अवसर पर हजारों लाखों श्रद्धालु पवित्र नदी में स्नान कर अपने शरीर के साथ - साथ अपनी अंतरात्मा को भी शुद्धि प्रदान करते हैं। यहां पर आने वाला हर एक व्यक्ति अलौकिक अनुभव करता है ।आध्यात्मिक दृष्टि से भी कुंभ तथा अर्ध कुंभ के समय में  ग्रहों की स्थिति ,ध्यान साधना तथा एकाग्रता के लिए उत्कृष्ट होती है।

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महाकुंभ मेला 



कुंभ से संबंधित पौराणिक कथा:

 कुंभ पर्व की सर्वाधिक प्रचलित कथा देवता और दानव द्वारा किए गए समुद्र मंथन की है। ' कुंभ ' शब्द का संस्कृत में अर्थ होता है  ' कलश ' और यह कथा भी समुद्र मंथन के पश्चात निकले हुए अमृत कुंभ अर्थात अमृत कलश की है।

कथा के अनुसार महर्षि दुर्वासा द्वारा दिए गए शाप के कारण  इंद्र तथा तथा सभी देवतागण निर्बल हो गए। दैत्यों ने देवताओं पर आक्रमण करके उन्हें आसानी से परास्त कर दिया। इस स्थिति से चिंतित हो जब सभी देवतागण भगवान विष्णु के पास गए तब भगवान विष्णु ने देवताओं को दैत्यों के साथ मिलकर क्षीरसागर का मंथन कर अमृत निकालने की सलाह दी। भगवान विष्णु विष्णु की सलाह पर सभी  देवतागण दैत्यों के साथ मिलकर समुद्रर मंथन की प्रक्रिया आरंभ कर अमृत कुंभ निकालने के यत्न में लग गए।

अमृत कुंभ के निकलते ही देवताओं के इशारे पर इंद्र पुत्र  'जयंत ' अमृत कलश को लेकर आकाश में उड़ गए। जब दैत्यों को इस बात का पता चला तो वे भी अमृतकलश को पाने के लिए ' जयंत ' को पकड़ने उनके पीछे गए। अमृत कलश पर अधिकार पाने के लिए देवता और दानवों में बारह दिनों तक अविराम युद्ध चलता रहा। इस प्रकार से छिना -झपटी तथा मारकाट के दौरान अमृत कुंभ से अमृत की कुछ बूंदे पृथ्वी पर चार स्थानों ( प्रयाग , हरिद्वार , उज्जैन , नासिक ) पर गिरी थी इसीलिए इन स्थानों पर कुंभ पर्व का आयोजन होता है।

कुंभ मेला 2019 :

 नए साल 2019 में संगम नगरी इलाहाबाद में अर्धकुंभ का पर्व आयोजित होने जा रहा है। गंगा , जमुना , सरस्वती के संगम तट पर 15 जनवरी से 4 मार्च तक भव्य कुंभ मेले का आयोजन होगा । इस आयोजन में देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी करीब 12 करोड़ श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है । यहां होने वाले शाही स्नान की तारीख का भी ऐलान हो चुका है । आइए जानते हैं 2019 कुंभ मेले की शाही स्नान की तारीख।

2019 कुंभ मेले की शाही स्नान की तारीख:


  • 14 - 15 जनवरी 2019: मकर सक्रांति (पहला शाही स्नान)
  •  21 जनवरी 2019: पौष पूर्णिमा
  • 31 जनवरी 2019 : पौष एकादशी स्नान
  • 4 फरवरी 2019 : मौनी अमावस्या (मुख्य शाही स्नान, दूसरा शाही स्नान )
  • 10 फरवरी 2019 : बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान)
  • 16 फरवरी 2019 : माघी एकादशी 
  • 19 फरवरी 2019 : माघी पूर्णिमा 
  • 4 मार्च 2019 : महाशिवरात्रि

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