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Diwali 2018: Date And Shubh Muhurat Calendar In Hindi


दिवाली 2018 :

दीपावली हिंदू धर्म के लोगों का एक प्रमुख पर्व है। रोशनी का यह पर्व अपने साथ उत्साह ,उमंग और खुशियां लेकर आता है और सभी के जीवन को जगमगाती हुइ खुशियों से भर देता है। बच्चे हो या बड़े सभी को पूरे साल इस पर्व का इंतजार रहता है।

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हैप्पी दिवाली 2018 


दिवाली कब और क्यों मनाई जाती है?

दीपावली हर साल कार्तिक महीने की अमावस्या को मनाई जाती है। इस पर्व को मनाने के पीछे यह मान्यता है कि भगवान राम इसी दिन चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। भगवान राम  के अयोध्या वापस आने की खुशी में सभी अयोध्या वासियों ने अपने घरों में घी के दीपक जलाए थे और पूरी अयोध्या नगरी को रोशनी से जगमगा दिया था। इसीलिए इस पर्व को प्रकाशोत्सव भी कहते है।
दीपावली का यह त्योंहार पूरे भारतवर्ष में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। दीपावली पर्व की खास बात यह भी है कि यह पर्व पूरे पाँच दिनों तक मनाया जाता है। इन पाँच दिनों में अलग-अलग त्योंहार मनाए जाते हैं। वे पाँच त्योहारों के नाम इस प्रकार है:

  त्योहारों के नाम                      त्योहारों की तिथि
( Diwali 2018 )                     ( Festival Dates)

1) धनतेरस                              5 नवंबर 2018

2) छोटी दिवाली/                      6 नवंबर 2018
     नरक चतुर्दशी

3) बड़ी दिवाली/                        7 नवंबर 2018
     लक्ष्मी पूजन

4) गोवर्धन पूजा                          8 नवंबर 2018

5) भाई दूज/                               9 नवंबर 2018
     भाऊ बीज

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दिवाली 2018: क्या है शुभ मुहूर्त, कब करें पूजा?

दीपावली में माता धन लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने तथा उनकी विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा-अर्चना की जाती है । अपने घर परिवार के सुख - समृद्धि और ऐश्वर्य को बनाए रखने के लिए माता लक्ष्मी का उपवास रखा जाता हैं तथा सूर्यास्त के पश्चात उनकी पूजा अर्चना की जाती हैं । हिंदू धर्म में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व  है । हर कार्य का शुभारंभ शुभ मुहूर्त देखकर होता है । तो आइए जानते हैं इस वर्ष में क्या है लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त।

दिवाली 2018: इस बार दिवाली बुधवार 7 नवंबर को मनायी जाएगी।

लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त: 17:57 से लेकर 19:53
                            ( शाम 5:57 से लेकर 7:53 तक )

प्रदोष काल   :         17:30 से 20:11
                           ( शाम 5:30 से लेकर 8:11 तक )

वृषभ काल    :        17:57 से लेकर 19:53
                            ( शाम 5:57 से लेकर 7:53 तक)

अमावस्या तिथि आरंभ  : ( 6 नवंबर) 22:27 से

अमावस्या तिथि समाप्त : ( 7 नवंबर) 21:31 तक

दीपावली में लक्ष्मी पूजा का महत्व:

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दीपावली में लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व है । अगर इस दिन माता लक्ष्मी की सच्चे भक्ति - भाव और श्रद्धा के साथ पूजन किया जय माता लक्ष्मी अपने भक्तों पर जरूर प्रसन्न होती है और उनका घर धन- दौलत और सुख समृद्धि  से भर देती है। दिवाली में माता महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा प्रदोष काल में करनी चाहिए, जो कि सूर्यास्त के बाद  शुरू होता है। प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न में पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है। कहा जाता है कि अगर प्रदोष काल के स्थिर लग्न में माता लक्ष्मी की पूजा- अर्चना की जाए तो वे घर में ही स्थिर रहती हैं ,कहीं नही जाती है। इसीलिए ये लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है।
वृषभ काल ही स्थिर लग्न होता है जो दिवाली के त्यौहार में प्रदोष काल में आता है।लेकिन अगर हम किसी कारणवश वृषभ काल में पूजा नहीं कर पाते है तो इस दिन किसी भी लग्न में पूजा कर सकते हैं।

दिवाली के पूजा के लिए चार मुहूर्त होते हैं जो इस प्रकार है:

1) वृश्चिक लग्न - यह दिवाली के दिन की सुबह का समय होता है । इसमें ज्यादातर फिल्मी कलाकार ,टीवी,  राजनैतिक  लोग घर ,मंदिर  स्कूल, कॉलेज इत्यादि जगहों पर लक्ष्मी पूजा की जाती है।

2) कुंभ लग्न- यह दिवाली के दिन का दोपहर का समय होता है। इस लग्न में वे लोग लक्ष्मी पूजा करते हैं जो  बीमार होते हैं , जिनकी शनि की दशा खराब चल रही होती है या फिर जिनकी व्यापार में बड़ी हानि हुई हो।

3) वृषभ लग्न - यह दिवाली के दिन का शाम का समय होता है । यह  स्थिर लग्न होता है। इसलिए ये लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है।

4) सिहं लग्न- यह दिवाली की मध्य रात्रि का समय होता है। इसमें ज्यादातर तांत्रिक लोग लक्ष्मी पूजा करते हैं।

दीपावली के त्योहार की तैयारी घरों में महीने पहले से ही शुरू हो जाती है। दीपावली में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है क्योकि माता लक्ष्मी वही निवास करती है जहाँ स्वच्छता होती है। दीपावली में घर में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं , स्वादिष्ट मिठाईयां बनाई जाती है। बच्चे - बड़े सभी के लिए नए -नए कपड़े खरीदे जाते हैं । घर से लेकर बाहर सभी जगह जलते दिए और जगमगाती हुई लाईट और कंदीले  लगाई जाती है। लोग घरों में और घरों के बाहर लक्ष्मी जी का स्वागत करने के लिए रंगोली बनाते हैं।

तो दोस्तों ! जीवन को अंधकार से प्रकाश में ले जाने का संकेत देने वाला यह पर्व आप सभी के जीवन को भी रोशनी की जगमगाहट और खुशियों से भर देगा इसी विश्वास के साथ आप सभी को दिवाली की बहुत-बहुत शुभकामना!

                        

              

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