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भारत रत्न :श्री अटल बिहारी वाजपेयी /Bharat Ratna Shri Atal Bihari Vajpayee


भारत रत्न :श्री अटल बिहारी वाजपेयी /Bharat Ratna Shri Atal Bihari Vajpayee 

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श्री अटल बिहारी वाजपेयी 


भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी का 16 अगस्त 2018 को 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से सारे देश में शोक की लहर दौड़ गई । दुनिया में बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो एक ही जीवन में कई जिंदगियां जी लेते हैं l अटल जी उन्ही में से एक थे । वे कुशल राजनीतिज्ञ, कवि ,पत्रकार और एक सीधे और सच्चे इंसान थे। उनका चरित्र ओजस्वी, तेजस्वी और यशस्वी था ।उनके व्यकितत्व में एक चुंबकीय आर्कषण था । जो भी उनसे एक बार मिलता था उनके सीधे -सच्चे व्यक्तितत्व से प्रभावित हुए  बिना नही रह पाता था।

अटल बिहारी वाजपेयी का आरंभिक जीवन:

अटल जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में एक मध्यमवर्गीय  परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम कृष्णा बिहारी वाजपेयी था जो एक कवि और स्कूल टीचर थे ।उनकी माता का नाम कृष्णा देवी था ।अटल जी के 7 भाई-बहन थे। ग्वालियर के सरस्वती शिशू मंदिर से उन्होनें स्कूल की पढ़ाई पूरी की। ग्रेजुएशन ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अभी लक्ष्मीबाई कॉलेज)से पूरा करने के बाद उन्होंने  कानपुर के DAV कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। उन्होनें लॉ कॉलेज में आगे पढ़ने के लिए आवेदन किया लेकिन पढ़ाई में मन ना लगने के कारण उन्होंने आरएसएस द्वारा प्रकाशित पत्रिका में एडिटर का काम करना शुरू कर दिया।उन्होने कभी शादी नही कि लेकिन उन्होने दो बेटियाँ नमिता और नंदिता को गोद लिया था।

अटल जी का राजनैतिक सफर:

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अटल जी  एक प्रतिभावान राजनैतिज्ञ थे। उन्होंने अपना राजनैतिक सफर एक स्वतंत्रता संग्रामी के रूप में शुरू किया। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होनें सक्रिय भूमिका निभाई और कई नेताओं के साथ वे जेल भी गए।अपने राजनैतिक सफर में अटल जी सबसे आर्दशवादी व प्रशंसनीय राजनेता के रूप में उभरे।चाहे सत्ता दल हो या विपक्षी दल हर कोई उन्हें बड़े ध्यान से सुनता था और उनकी बातों का सम्मान करता था।अटल जी को अपनी मातृभाषा हिंदी से बहुत प्यार था। वे पहले ऐसे राजनेता बने जिन्होंने यू.एन.जनरल एसेंबली में हिंदी में भाषण दिया था।जवाहरलाल नेहरु के बाद अटल जी ही 3 बार देश के प्रधानमंत्री बने।पहली बार1996 में सिर्फ 13 दिनों के लिए,दूसरी बार 1998 में एक साल के लिए और तीसरी बार 1999 में वे फिर प्रधानमंत्री लने और इस बार उन्होने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया।
5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले वे पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे। अटल जी चार अलग -अलग प्रदेश -उत्तर प्रदेश,मध्यप्रदेश,गुजरात व दिल्ली से सासंद चुने गए। अटल जी 10 बार लोकसभा के लिए और 2 बार राज्यसभा के लिए चुने गए।

अर्वाड व एचीवमेन्ट्स:

1) 1992 में देश के लिए अच्छे कार्य करने के कारण अटल जी को पदम विभूषण से सम्मानित किया गया।
2) 1994 में उन्हें बेस्ट सांसद का अवार्ड मिला।
3) 2015 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से अटल जी को सम्मानित किया गया ।यह सम्मान उनके जन्म दिवस 25 दिसंबर को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा उनके निवास स्थान पर जा कर दिया गया। अटल जी के लिए पहली बार किसी राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल तोड़कर घर जाकर सम्मान दिया।
अटल बिहारी वाजपेयी  एक कवि के रूप में:
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अटल जी को शब्दों का जादूगर कहा जाता था।उन्हें कविता लिखने का बहुत शौक था।उनका मानना था कि अपने विचारों को लोगों तक पहुंचाने के लिए कविता से अच्छा माध्यम कुछ और नहीं हो सकता है। इसीलिए अटल जी जब भी अपने विचारों की शक्ति को शब्दों के  रूप में कलम द्वारा कागज पर उतारते थे तब उनके एक- एक शब्द लोगों के मानस पटल पर छा जाते थे।  उनकी कविताओं में एक तरफ राष्ट्रभक्ति का जोश होता था तो दूसरी तरफ देश के दुश्मनों के लिए कड़ी चेतावनी भी होती थी।

अटल जी के प्रसिदध कविताओं के कुछ अंश:

मैं जी भर जिया...
मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ

लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूँ ?
तू दबे पांव ,चोरी-छिपे से ना आ
सामने वार कर फिर मुझे आज़मा
मौत से बेखबर, जिंदगी का सफर
शाम हर सुरमई ,रात बंसी का स्वर


हार नही मानूंगा...
क्या हार में क्या जीत में

किंचित नहीं भयभीत मैं
कर्तव्य पथ पर जो भी मिला
यह भी सही वो भी सही
वरदान नहीं मांगूंगा
हो कुछ पर हार नहीं मानूंगा


गीत नया गाता हूं...
टूटे हुए सपनों की 

कौन सुने सिसकी 
अंतर की चीर व्यथा
पलकों पर ठिठकी
हार नहीं मानूंगा 
रार नहीं ठानूंगा
काल के कपाल पर
लिखता- मिटाता हूं 
गीत नया गाता हूं


ठन गई

मौत से ठन गई!

जूझने का मेरा इरादा न था ,

मोड़ पर मिलेंगे 
इसका वादा न था ,
रास्ता रोक कर 
वह खड़ी हो गई ,
यों लगा जिंदगी
से बड़ी हो गई।


" मेरे प्रभु मुझे इतनी

ऊंचाई कभी मत देना,
गैरों को गले न लगा
सकूं मुझे इतनी
रुखाई कभी मत
देना"



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