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कैलाश मानसरोवर यात्रा


कैलाश मानसरोवर की महिमा:


ॐ नमः शिवाय 

कैलाश मानसरोवर :



कैलाश मानसरोवर  भगवान शिव के प्रमुख निवास स्थान के रूप में जाना जाता है। कैलाश पर्वत पर कैलाशपति शिव शंकर माता पार्वती के साथ विराजते हैं। इस स्थान को ' कैलाश मानसरोवर तीर्थ 'भी कहा जाता है और शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से इसे सर्वश्रेष्ठ माना गया है। कैलाश मानसरोवर उतना ही प्राचीन है जितनी हमारी सृष्टि है । कैलाश मानसरोवर को धरती का केंद्र माना जाता है। यह हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार भारतीय उपमहाद्वीप के चारों ओर पहले समुद्र होता था ,रशिया से इसके टकराने के फलस्वरुप हिमालय का निर्माण हुआ।
यह एक अलौकिक स्थान है।कैलाश मानसरोवर की यात्रा अपने धार्मिक मूल्यों और सांस्कृतिक महत्व के कारण जानी जाती है ।हर साल भोलेनाथ के सैकड़ो भक्त इस तीर्थ यात्रा पर जाते है । कैलाश मानसरोवर की यात्रा से  भक्तों को असीम शांति का अनुभव होता हैं। इस पावन स्थल को भारतीय दर्शन के हृदय की उपमा दी जाती है। कैलाश पर्वत के दक्षिण भाग को नीलम, उत्तर को स्वर्ण ,पूर्व भाग को क्रिस्टल और पश्चिम को रूबी के रूप में माना जाता है।
कैलाश पर्वत माला कश्मीर से लेकर भूटान तक फैली हुई है ।ल्हा चू और झोंग चू के बीच कैलाश पर्वत है, जिसके उत्तरी शिखर का नाम कैलाश है ।कैलाश पर्वत को' गण पर्वत 'और' रजतगिरि' की भी कहा जाता है। कैलाश पर्वत समुद्र सतह से 22,028 फीट ऊंचा है। इसकी आकृति एक विराट शिवलिंग की तरह है ।यह सदैव बर्फ से आच्छादित रहता है कैलाश पर्वत की बाहरी परिधि 52 किलोमीटर है।
यह हिमालय के उत्तरी क्षेत्र में तिब्बत प्रदेश में स्थित एक तीर्थ है। क्योंकि तिब्बत चीन के अधीन है ,अतः कैलाश चीन में आता है ।यह तिब्बती धर्म, जैन धर्म, बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म के लोगों के अध्यात्म का केंद्र है ।

 मानसरोवर :

                 ॐ नमः शिवाय

मानसरोवर पहाड़ों से घिरी झील है ,जो पुराणों में 'क्षीर सागर' के नाम से वर्णित है। मानसरोवर तिब्बत में स्थित एक झील है ।यह झील लगभग  4556 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसकी परिमिति लगभग 88 किलोमीटर और औसत गहराई 90 मीटर है।यह  झील  लगभग 320 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है ।इसके उत्तर में कैलाश पर्वत तथा पश्चिम में राक्षस ताल है ।

हिंदू धर्म में इस झील को बहुत ही पवित्र माना गया है। हिंदू विचारधारा के अनुसार यह झील सर्वप्रथम भगवान ब्रहमा के मन में उत्पन्न हुआ था ।संस्कृत का शब्द मानसरोवर मानस तथा सरोवर को मिलाकर बना है। जिस का शाब्दिक अर्थ होता है मन का सरोवर ।मान्यता है कि यहाँ ब्रह्ममुहुर्त (प्रातःकाल 3 से 5 बजे ) के बीच में देवगन यहां स्नान करते हैं।
ऐसा माना जाता है कि महाराज मांधाता ने मानसरोवर झील की खोज की और कई वर्षों तक इस किनारे तपस्या की की थी जो कि इन पर्वतो की तलहटी में स्थित है। पुराणों के अनुसार इस पवित्र झील की एक परिक्रमा से एक जन्म तथा 10 परिक्रमा करने से हजार जन्मों के पापों का नाश और 108 बार परिक्रमा करने से प्राणी भवबंधन से मुक्त होकर ईश्वर में समाहित हो जाता है।
कैलाश मानसरोवर एक अद्भुत और रहस्यमयी स्थान है। आइए ,इस वीडियो के माध्यम से इसके रहस्यों के बारे में जाने:

             

 रहस्यमयी कैलाश पर्वत के 13 सबसे बड़े रहस्य 

 राक्षस ताल: 

राक्षस ताल लगभग 225 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है ।इसकी परिधि 84 किलोमीटर तथा गहराई 150 फुट है। मान्यताओं के अनुसार इसे राक्षस ताल इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां  यह प्रचलित है कि राक्षसों के राजा रावण ने यहां पर कई वर्षों तक शिव की आराधना की थी ।

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गौरी कुंड:

गोरी कुंड की चर्चा शिव पुराण में की गई है। एक पौराणिक  कहानी से जुड़े होने की वजह से इस स्थान का अध्यातिमक  दृष्टिकोण से बहुत गहरा महत्व है।कहानी  भगवान श्री गणेश  से जुड़ी हुई है। ऐसी मान्यता है कि माता पार्वती ने इसी जगह पर भगवान श्री गणेश की मूर्ति में प्राण  फूँका था।

कैलाश- मानसरोवर कैसे पहुंचे?


विदेश मंत्रालय प्रत्येक वर्ष जून से सितंबर के दौरान दो अलग- अलग मार्गो से कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन करता है ।इसमें से एक मार्ग है ,लिपुलेख दर्रा ( उत्तराखंड ) और दूसरा है , नाथू- ला- दर्रा (सिक्किम )
कैलाश मानसरोवर जाने के लिए अनेक मार्ग है किंतु उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थान से अस्ककोट , खेल , गर्विअंग, लिपूलेट ,खिंड ,तकलाकोट होकर जाने वाले मार्ग अपेक्षाकृत  ज्यादा सुगम है ।यह  भाग 544 किलोमीटर  (338 मील नंबर ) लंबा है और इसमें अनेक उतार-चढ़ाव है ।जाते समय सरलकोट तक 70 किलोमीटर (44 मील ) की चढ़ाई है ।उसके आगे 74 किलोमीटर  (46 मील ) उतराई  है । मार्ग में यात्रियों के ठहरने के लिए अनेक धर्मशाला और आश्रम बनाए गए हैं ।

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